प्रदेश सरकार को पेंशनरों की दो टूक – अनुदान का बहाना बना कर प्रदेश के पेंशनरों और कर्मचारियों का मंहगाई भता फ्रीज करने और एरीयर न देने का फैसला लिया तो सरकार को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स सयुंक्त सघर्ष समिति की प्रदेश कार्यकारणी की आपातकाल बैठक समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में संपन्न हुई और यह फैसला लिया गया कि जिस तरीके से प्रदेश के प्रधान वित्त सचिव नें सरकार को वित्तीय प्रेजेन्टेशन में सुझाव दिये हैं कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान बंद होने की बजह से प्रदेश की वित्तीय स्थिति की भरपाई करने के लिए प्रदेश के पेंशनरों और कर्मचारियों का मंहगाई भता फ्रीज़ करना होगा और एरियर को भी नहीं दिया जा सकता है। इसके साथ ही और भी बहुत सारे फैसले लेने बारे प्रस्ताव दिए गए हैं, जबकि सरकार के प्रतिनिधियों पर और सरकारी खर्चो पर अंकुश लगाने बारे कोई कटौती करने बारे प्रस्ताव नहीं हैं। प्रदेश सरकार को पेंशनरोंऔर कर्मचारियों को 13% मंहगाई भता और 146 महीने का मंहगाई भते के एरियर के साथ करोड़ों रूपये की वित्तीय अदायगी करने को है जिसमे संशोधित कम्युटेशन, ग्रेचुटी और लीव इन कैशमेंट 1.1.2016 से देय है। करोड़ों रूपये के चिकत्सा भते की अदायगी के बिल्लों की अदायगी करने को है जबकि 500 से ज्यादा पेंशनर्स बिना पैंशन के स्वर्ग सिधार गए हैं। प्रधान वित्त सचिव नें हिमकेयर योजना, सहारा योजना को बंद करना और सामाजिक सुरक्षा पैंशन मैं कटौती करने का जो प्रस्ताव दिया है उसकी भी समिति कड़े शब्दों मैं निंदा करती है। समिति ने सरकार द्वारा पिछले तीन वर्षों में लिए गए गलत फैसलों का, अपनी मित्र मंडली को खुश करने के लिए सरकारी खजाने की लूटमार करना, और सरकार नें जो सलाहकार नियुक्त किये हैं जिनके पास तुजरवा ही नहीं है उनकी गलत सलाह से आज प्रदेश का दिवालिया निकल चुका है उसके लिए मुख्यमंत्री जी, उनकी सरकार और पार्टी ज़िम्मेदार है और अब जबकि सरकार भारी वितय संकट मैं है और बह पेंशनरों और कर्मचारियों की देंदारिया नहीं दे सकती है तो उन्हें अपने पदों से त्यागपत्र दे देना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन ब मेंबर्स की पैंशन को महीने में 6 गुना तक बढ़ाने बारे, अथार्थ 8000/- रूपये और 7500/- रूपये क्रमशः से 48000/- रूपये और 45000/- रूपये क्रमशः महीने के बढ़ाने तथा 6% सालाना बेसिक पैंशन की बढ़ोतरी करने बारे भी हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स सयुंक्त सघर्ष समिति नें कड़े शव्दो में सरकार की निंदा की है। सरकार इस समय वित्तीय संकट का बहाना बना कर प्रदेश के पेंशनरों की वित्तीय देनदारियों को देने के लिए आनाकानी कर रही है। प्रदेश में वित्तीय डिज़ास्टर लॉकडाउन लगने के बाबजूद भी अपने चेहतों को ख़ुश करने के लिए कई तरह के वित्तीय लाभ देने बारे फैसले लिए जा रहे हैं जिससे जरूरतमंद गरीब लोगों को अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है। इस अधिसूचना से पहले भी सरकार नें सरकारी विभागों में निगमों और बोर्डो में बहुत सारे चेयरमैन, वाईस चेयरमैन और मेंबर्स की नियुक्तियां कर के और फिर उनमें से बहुत सारों को कैबिनेट रैंक से नवाजकर भी सरकार पर भारी वित्तीय बोझ डाला है। सरकार नें सभी माननीयों में विधायकों, मंत्रियों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री की वेतन व भत्तों में भी महीने में 40% की वृद्धि की भी अधिसूचना जारी की है जिससे भी आगे प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर भारी बोझ पड़ने बाला है। इसके अलावा भी कई तरह के पदों से सरकार नें सलाहकार, मुख्य सलाहकर बना कर अपनी मित्र मंडली को खुश करने के लिए काम किये हैं और अभी भी कई तरह की नियुक्तियां की जा रही हैं। सुरेश ठाकुर नें सरकार की कार्याप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार को चेतावनी दी है की सरकार अपनी मित्र मंडली को ख़ुश करने के लिए सरकारी खजाने पर बोझ न डालकर और पेंशनरों और कर्मचारियों की करोड़ों -करोड़ों रूपये की देनदारियों से पला न झाड़े बल्कि उन्हें देने के लिए अधिसूचना जारी करें और विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, स्पीकर की तन्खाह और पैंशन मैं कटौती करें, चेयरमैन, वाईस चेयरमैन, सलाहकारों को उनके असंबिधानिक पदों से तुरन्त हटायें और सरकारी खर्चो मैं कटौती करने की सलाह दी है बजाये पेंशनरों की देन्दारियों को बंद करना।
समिति का कहना है कि 28/11/2025 को धर्मशाला जोरावार स्टेडियम में पेंशनर्स सयुंक्त सघर्ष समिति द्वारा हज़ारो की संख्या में पेंशनरों की मांगों को मनवाने बारे सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करना और फिर विधानसभा धर्मशाला में मुख्यमंत्री द्वारा शिष्टमण्डल को विधानसभा में बुला कर बातचीत करने के बाद यह आश्वासन देना के शिष्टमण्डल को बातचीत के लिए विधानसभा सैशन के समाप्त होने के एक सप्ताह में बुलाया जायेगा और फिर मुख्यमंत्री द्वारा आज दिन तक शिष्टमण्डल को बातचीत के लिए न बुलाना और न ही पेंशनरों की मांगों को मानना ये ऐसे वाक़ए हैं जिससे साफ होता है कि मुख्यमंत्री पेंशनरों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं।
पेंशनर्स सयुंक्त सघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री पर वादाखिलाफ़ी करने और पेंशनरों के साथ गंदी राजनीति करने के आरोप लगाए । समिति ने प्रधान वित्त सचिव द्वारा सरकार को प्रेजेंटेशन दे कर पेंशनरों और कर्मचारियों को वित्तीय लाभों को न देने के बारे में रखे गए प्रस्तावों का कड़ा संज्ञान लिया है और कहा है कि अगर सरकार पेंशनरों की मांगों के विचार विमर्श करने के लिए सरकार शिष्टमण्डल को एक सप्ताह के अन्दर नहीं बुलाती है तो सयुंक्त सघर्ष समिति प्रथम चरण में 17 और 18 फरबरी को शिमला में धरने पर बैठकर रोष प्रकट करेगी और उसके बाद जैसे ही विधानसभा के बजट सत्र की तारीख की घोषणा होती है उसके पहले दिन ही रोष रैली निकाली जाएगी और फिर प्रतिदिन शिमला में धरने पर लगातार बैठने का फैसला लिया है। पेंशनर्स आंदोलन से भटकेंगे नहीं और अगला आंदोलन धर्मशाला से भी व्यापक होगा। पेंशनरों की मुख्य मांगों में शामिल है 1.1.2016 से लेकर 31.1.2022 तक सेवानिवृत कर्मचारियों की ग्रटुइटी, लीव इनकाशमेंट, कम्युटेशन और संशोधित पैंशन की अदायगी, 13% मेहगाई भता, 146 महीने का मेहगाई भते का अर्रेंर, हिमाचल पथ परिवहन के पेंशनरों को हर माह पैंशन की अदायगी पहली तारीख को करना और पैंशन का परमानेंट समाधान करना, शहरी नगर निकायों के पेंशनरों को 1.1.2006 के बजाये 1.1.2016 के बेतन आयोग की अनुशंसा के आधार पर पैंशन देना, कारपोरेट सेक्टर के कर्मचारियों और फारेस्ट कारपोरेशन के कर्मचारियों को सरकार द्वारा जारी 1999 की अधिसूचना के आधार पर 2004 से पैंशन देने का फैसला लेना, और 1999 की अधिसूचना को फिर से लागू करना, विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को ओ. पी. एस. का लाभ देना और पेंशनरों की बकाया राशि का भुगतान करना, चिकत्सा बिल्लों के भुगतान के लिए तुरन्त 15 करोड़ रूपये की राशि जारी करना, पुलिस के पेंशनरों के बच्चों को पुलिस विभाग में नौकरी के लिए कोटा निर्धारित करना और भारतीय सेना से सेवानिवृत हुए कर्मचारियों की तरह कैंटीन की सुबिधा प्रदान करना, हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन को सरकार द्वारा प्रिंटिंग आदि के 70 करोड़ रूपये की अदायगी करना, हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पेंशनरों को महीने की पहली तारीख को पैंशन की अदायगी आदि करना आदि आदि।
समिति नें यह भी फैसला लिया है कि सयुंक्त सघर्ष समिति का एक शिष्टमण्डल 18 फरबरी को माननीय राज्यपॉल महोदय हिमाचल प्रदेश से शिमला में मिलकर एक ज्ञापन उन्हें सोम्पेगा जिसमे उनसे अनुरोध किया जायेगा कि प्रदेश कि नाजुक वित्तीय स्थिति का हवाला देकर केंद्र सरकार को सुझाब दिया जाए कि प्रदेश की सरकार को आर्टिकल 360 के तहद भंग कर के प्रदेश में राष्ट्रपति शासन तुरंत लगाया जाए।
सुरेश ठाकुर,चेयरमैन,इन्दर पॉल शर्मा महासचिव, भूप राम वर्मा अतिरिक्त महासचिव, सैन राम नेगी, मीडिया प्रभारी।
