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प्रदेश के प्रस्तावित सीबीएसई स्कूलों की सम्बद्धता को लेकर शिमला में सर्व अध्यापक संघ की आम बैठक सम्पन्न, शिक्षकों ने पुनर्परीक्षा सहित कई अन्य बिंदुओं पर जताई नाराज़गी

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जिला शिमला में सर्व अध्यापक संघ/जॉइंट टीचिंग फेडरेशन का एक महत्वपूर्ण जनरल हाउस आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक शिमला HPSLC इकाई के आह्वान पर संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला शिमला लेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान दविंदर लक्टू ने की तथा संचालन में जिला एचपीएसएलए सचिव आकाशदीप शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश लेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान अजय नेगी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, रामपुर, ननखड़ी तथा शिमला शहरी क्षेत्र के अनेक विद्यालयों से सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।
सभा की मुख्य चर्चा राज्य सरकार द्वारा चयनित विद्यालयों को सीबीएससी से संबद्ध करने के निर्णय तथा 19 जनवरी को जारी अधिसूचना को राजपत्र में यथावत प्रकाशित किए जाने पर केंद्रित रही। वक्ताओं ने कहा कि CBSE से संबद्धता का विचार सैद्धांतिक रूप से सकारात्मक हो सकता है, अलग CBSE कैडर बनाने का प्रावधान शिक्षकों में असंतोष और असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर रहा है। उनका मत था कि एक ही सरकार के अंतर्गत दो अलग बोर्ड और दो अलग कैडर व्यवस्था से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा तथा इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ेगा।


बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि 30–35 वर्षों का अध्यापन अनुभव रखने वाले शिक्षकों को CBSE विद्यालयों में जाने के लिए पुनः परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है, जो उनके लंबे अनुभव और योगदान पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शिक्षकों ने कहा कि जिन्होंने हजारों विद्यार्थियों को उच्च पदों तक पहुँचाया, उन्हें दोबारा योग्यता सिद्ध करने के लिए बाध्य करना निराशाजनक है। वरिष्ठता समाप्त होने तथा पूर्व सेवा वर्षों का लाभ न मिलने की आशंका भी व्यक्त की गई।
मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद अधिसूचना में वरिष्ठता संरक्षण से संबंधित बिंदुओं को न हटाए जाने पर भी असंतोष व्यक्त किया गया। 22 मार्च को प्रस्तावित शिक्षक चयन परीक्षा की तिथि पर भी आपत्ति जताई गई, क्योंकि उसी अवधि में Himachal Pradesh Board of School Education
की बोर्ड परीक्षाएँ संचालित होती हैं। परीक्षा एजेंसी जैसे हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमिशन हिमाचल प्रदेश स्कूल एजुकेशन बोर्ड से कहीं बड़ी परीक्षा करने वाली एजेंसी है और लगभग सभी अध्यापक इन्हीं एजेंसियों से छंटनी परीक्षा के तहत आए हुए हैं और आज हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के द्वारा अध्यापकों की ली जाने वाली इस परीक्षा के कारण उसकी विश्वसनीयता और उपयुक्तता पर भी प्रश्न उठाए गए तथा चयन प्रक्रिया में विद्यालय विकल्प, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
अंत में JBT, C&V, TGT, प्रवक्ता, मुख्याध्यापक और प्रधानाचार्य वर्ग के प्रतिनिधियों ने एकमत से प्रस्तावों का विरोध दर्ज करते हुए संयुक्त रूप से आगे की रणनीति बनाकर शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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