आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने की गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से भेंट,भजन पर किया सामूहिक नृत्य
आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर बैंगलोर ने संस्था के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक मास के समारोह के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार तथा सुप्रसिद्ध कथावाचक व भक्तिपीठ के संस्थापक इंद्रेश उपाध्याय का आत्मीय स्वागत किया। आर्ट ऑफ लिविंग की प्रदेश मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने बताया कि अपने भ्रमण के दौरान, इन गणमान्य अतिथियों ने वैश्विक मानवतावादी एवं आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से भेंट की, जिन्होंने गत बुधवार को अपनी आयु के 70 वर्ष पूर्ण किए हैं। इस महत्त्वपूर्ण पड़ाव को रेखांकित करते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उनके जीवन को ‘पूर्णतः दूसरों की सेवा में समर्पित जीवन’ की संज्ञा दी। ये विशिष्ट विभूतियां गुरुदेव की असाधारण विरासत का सम्मान करने तथा इस ऐतिहासिक समारोह का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने हेतु आश्रम में एकत्रित हुई थीं।
तत्पश्चात, सभी अतिथियों ने ‘ध्यान मंदिर’ में गुरुदेव के साथ एक विशेष सत्संग में सहभागिता की। इस नवनिर्मित एवं प्रतिष्ठित ध्यान कक्ष का उद्घाटन 10 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ था।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा, “मैंने गुरुकुल, गौशाला, कौशल विकास केन्द्र और आयुर्वेद केंद्र का दौरा किया। यहाँ जो समर्पण की भावना मैंने देखी, वह शब्दों से परे है।”
उन्होंने नशा मुक्ति के क्षेत्र में संस्था के कार्यों का भी उल्लेख करते हुए कहा –
यह कार्य केवल दवाइयों से संभव नहीं है। योग, ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से गुरुदेव जो आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, उसका वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं।
आज जब दुनिया तनाव, हिंसा, अवसाद और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत की आध्यात्मिक परंपरा संपूर्ण मानवता को दिशा देने की क्षमता रखती है। योग, ध्यान, सेवा और मानवीय मूल्यों के माध्यम से आर्ट ऑफ लिविंग ने भारतीय चेतना को विश्व पटल पर स्थापित करने का कार्य किया है।
आज सबसे बड़ी चिंता यह है कि युवा तेजी से नशे की ओर बढ़ रहे हैं। एक युवा अकेला नहीं टूटता, उसका पूरा परिवार और समाज प्रभावित होता है। इससे राष्ट्र की ऊर्जा कमजोर होती है।




अपने प्रवास के दौरान, गणमान्य व्यक्तियों ने विस्तृत एवं हरित परिसर का अवलोकन किया, जिसमें ‘श्री श्री गौशाला’ भी सम्मिलित है। यह गौशाला संपूर्ण भारतवर्ष की 19 दुर्लभ नस्लों की 1600 स्वदेशी गायों का आश्रय स्थल है। यह विलुप्त होते देशी गोवंश के संरक्षण तथा प्राकृतिक कृषि एवं ग्रामीण जनजीवन में उनकी अपूरणीय भूमिका को पुनर्जीवित करने का एक जीवंत प्रयास है।
हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा, “आज जब हम गुरुदेव का सत्तरवाँ जन्मोत्सव मना रहे हैं, तब हम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों जीवनों का उत्सव मना रहे हैं, जिन्हें उनके माध्यम से एक नई दिशा मिली।”
उन्होंने आगे कहा, “प्राकृतिक आपदाओं के कठिन समय में लोगों को केवल भौतिक सहायता ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक संबल की भी आवश्यकता होती है। आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों ने लोगों की आंतरिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।”
उन्होंने यह भी कहा, “आर्ट ऑफ लिविंग ने स्वयं को केवल योग और साधना तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि मानव सेवा को अपना प्रमुख मिशन बनाया है।”
प्रख्यात कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने कृष्ण भजन की प्रस्तुति से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
वे आर्ट ऑफ लिविंग के ‘प्रज्ञा योग’ (Intuition Program) के बालकों द्वारा प्रदर्शित अंतर्ज्ञान प्रक्रिया को देखकर अत्यंत विस्मित रह गए। यह कार्यक्रम इस अवधारणा पर आधारित है कि जब मन शांत होता है, तो अंतर्ज्ञान स्वाभाविक रूप से जाग्रत होता है। इस कार्यक्रम को पूर्ण करने वाले बालक आंखों पर पट्टी बांधकर भी पढ़ सकते हैं, रंगों की पहचान कर सकते हैं तथा अपने परिवेश का बोध प्राप्त कर सकते हैं। अंतर्ज्ञान अथवा अंतर्दृष्टि के माध्यम से इंद्रियों से परे देखने की बालकों की इस विलक्षण क्षमता का साक्षी बनते हुए उन्होंने टिप्पणी की, “इस प्रकार तो आप कृष्ण जीवन के अविस्मरणीय क्षणों के भी दर्शन कर सकते हैं!”
उन्होंने आगे कहा –
गुरुदेव उन संघर्षों का निवारण कुछ ही क्षणों में कर रहे हैं, जिनका समाधान करने में सरकारें वर्षों से विफल रही हैं।
“आज, मैंने इस स्थान से सकारात्मकता की एक सरिता प्रवाहित होते हुए देखी।”
“संपूर्ण विश्व को तो अनेक व्यक्ति प्रिय हो सकते हैं, परंतु वृंदावन को सभी प्रिय नहीं होते। जिन्हें स्वयं वृंदावन भी अपना ले, ऐसे हैं गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर।”
गुरुदेव के हिंसामुक्त एवं तनावरहित समाज के दृष्टिकोण ने किस प्रकार मानवता की सेवा तथा विश्व में शांति स्थापित करने पर केंद्रित एक वैश्विक आंदोलन का रूप धारण कर लिया है, इस पर विचार व्यक्त करते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने कहा था, “आज, यह (आर्ट ऑफ लिविंग) हमारे समक्ष एक विशाल वटवृक्ष की भांति खड़ा है, जिसकी सहस्रों शाखाएं विश्व भर में अनगिनत जीवनों का स्पर्श कर रही हैं।”
गुरुदेव के 70वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर 182 देशों से करोड़ो अनुयायी ‘वर्ल्ड मेडिटेट्स विद गुरुदेव फॉर ग्लोबल पीस’ ध्यान कार्यक्रम में आनलाइन जुड़े एवं विश्व शांति के लिए ध्यान किया।
हिमाचल प्रदेश में एक सार्थक पदचिह्न –
यह भेंट हिमाचल प्रदेश में आर्ट ऑफ लिविंग की सुदीर्घ एवं अत्यंत प्रभावपूर्ण उपस्थिति के परिप्रेक्ष्य में विशेष महत्त्व रखती है।
जून 2025 में जब मंडी जिले में बादल फटने की विनाशकारी घटना हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों मार्ग अवरुद्ध हो गए थे और सुदूर ग्रामों का संपर्क टूट गया था, तब आर्ट ऑफ लिविंग तथा आईएएचवी (IAHV) के 21 शिक्षक एवं 10 स्वयंसेवक वहां पहुंचने वाले प्रथम लोगों में से थे। उन्होंने क्षतिग्रस्त भू-भागों में, जहां किसी भी वाहन का पहुंचना असंभव था, प्रतिदिन आठ किलोमीटर की पदयात्रा कर प्रभावित परिवारों तथा एसडीआरएफ (SDRF) कर्मियों के लिए आघात-निवारण (ट्रॉमा-रिलीफ) एवं ध्यान सत्रों का संचालन किया। उन्होंने सौर ऊर्जा चालित दीप (सोलर लैंप), तिरपाल, भोजन, औषधियां एवं विद्यालयी सामग्री का वितरण किया।
पराला ग्राम की ठुलजू देवी कहती हैं, “अब तक कोई यह देखने नहीं आया था कि हम किस हाल में हैं। हमें प्रसन्नता है कि आप इस विकट घड़ी में हमारी चुनौतियों एवं आवश्यकताओं को सुनने आए हैं।” चौथी इंडिया रिजर्व बटालियन के डीएसपी मनोहर लाल ने आगे कहा: “आर्ट ऑफ लिविंग ने लोगों को उनके आंतरिक मनोबल के पुनर्निर्माण में सहायता प्रदान की।”
आपदा प्रबंधन से परे, आर्ट ऑफ लिविंग ने प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण के माध्यम से आजीविका के साधनों में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। सोलन में, व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान २००९ से ही कंप्यूटर, विद्युत कार्य एवं सौंदर्य प्रसाधन (ब्यूटीशियन) का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई एवं मोतियों के कार्य का प्रशिक्षण दिया गया है, और उनके उत्पाद आज राष्ट्रीय मेलों तक पहुंच रहे हैं।
45 वर्षों का राष्ट्रीय स्तर पर सुखद आश्चर्यजनक प्रभाव रहा है । संपूर्ण भारतवर्ष में, आर्ट ऑफ लिविंग आज 1356 निःशुल्क विद्यालयों का संचालन कर रहा है, जो वंचित समुदायों के 1.2 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसके नदी पुनरुद्धार कार्यों ने 75 नदियों एवं उनकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित किया है, जिससे 3.5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। वहीं, प्राकृतिक कृषि कार्यक्रमों ने 30 लाख कृषकों तक पहुंच स्थापित की है, जिससे उनके ऋण भार को कम करने, मृदा के स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करने एवं आजीविका में सुधार लाने में सहायता मिली है।
अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय में आयोजित एक मास तक चलने वाले इस समारोह में संगीत, ध्यान, ज्ञान, सेवा प्रकल्पों के शुभारंभ एवं प्रख्यात नेताओं के साथ भविष्योन्मुखी संवाद का समावेश है। यह समारोह गुरुदेव द्वारा प्रायः साझा किए जाने वाले उस शाश्वत सत्य को प्रतिबिंबित करता है कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन केवल तभी संभव है जब व्यक्ति आंतरिक रूप से शांत हो।
