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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बिगड़ा आम जनता का बजट, उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने जताई गहरी चिंता

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हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने देश और प्रदेश में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। परिषद का कहना है कि ईंधन के दामों में इस अप्रत्याशित वृद्धि का सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। मालभाड़े में भारी इजाफा होने के कारण बाजार में दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं जैसे सब्जियां, दूध, दालें, खाद्य तेल और अन्य राशन का सामान लगातार महंगा होता जा रहा है, जिससे आम जनता का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।

​बाजार पर अप्रत्यक्ष प्रभाव और मध्यम वर्ग की चुनौतियां

​परिषद के अध्यक्ष जोगेन्द्र कंवर व उपाध्यक्ष रणजीत सिंह धीमान ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि जब भी डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो उसका एक अप्रत्यक्ष प्रभाव पूरे बाजार पर देखने को मिलता है। उत्पादक केंद्रों से लेकर स्थानीय बाजारों तक सामान पहुंचाने की लागत बढ़ जाती है, जिसे अंततः मजबूरन आम उपभोक्ता को ही भुगतना पड़ता है। स्थिति यह हो गई है कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए अब घर चलाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

​उपभोक्ता अधिकारों की वकालत और प्रशासन को चेतावनी

​उपभोक्ता अधिकारों की वकालत करते हुए परिषद ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत हर नागरिक को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण आवश्यक वस्तुएं प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है। बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी या जमाखोरी न हो, इसके लिए उन्होंने प्रशासन को भी पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया है।

​परिषद की मुख्य मांगें:

​हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • केंद्र सरकार से मांग: आम जनता को इस चौतरफा महंगाई से राहत दिलाने के लिए ईंधन पर लगने वाले करों (Taxes) को तर्कसंगत बनाया जाए और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं।
  • स्थानीय प्रशासन से मांग: बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की नियमित जांच (Regular Inspection) की जाए, ताकि कोई भी दुकानदार या व्यापारी इस स्थिति का नाजायज फायदा उठाकर उपभोक्ताओं का शोषण न कर सके।

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