खाद्य तेलों के पैकिंग साइज निश्चित करने के केंद्र सरकार के ऐतिहासिक फैसले का हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने किया स्वागत,परिषद ने कहा- चालाकी भरी पैकेजिंग और ‘छिपी हुई मूल्य वृद्धि’ पर लगेगी लगाम
हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा लीगल मेट्रोलॉजी नियमों के तहत सरसों के तेल सहित सभी प्रमुख खाद्य तेलों के लिए मानक पैकिंग आकार (Standard Packing Sizes) निर्धारित करने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना की है। परिषद ने इसे एक उपभोक्ता-हितैषी कदम बताते हुए केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है।
चालाकी भरी पैकेजिंग और ‘छिपी हुई मूल्य वृद्धि’ पर लगेगी लगाम
परिषद के अध्यक्ष जोगेन्द्र कंवर और उपाध्यक्ष रणजीत सिंह धीमान ने एक संयुक्त बयान में कहा कि बाजार में बढ़ती गैर-मानकीकृत पैकिंग के कारण आम उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न ब्रांडों के बीच सही मूल्य की तुलना करना बेहद जटिल हो गया था। कंपनियां अक्सर चतुर पैकेजिंग के जरिए कम मात्रा देकर उपभोक्ताओं से पूरी कीमत वसूल रही थीं, जिससे एक तरह की ‘छिपी हुई मूल्य वृद्धि’ को बढ़ावा मिल रहा था।
अब केवल 9 मानक साइज ही होंगे मान्य
नए नियमों के अनुसार, अब सरसों और अन्य खाद्य तेलों के लिए केवल 9 मानक साइज ही मान्य होंगे:
- 200 ml / g
- 500 ml / g
- 1 लीटर
- 2 लीटर
- 3 लीटर
- 4 लीटर
- 5 लीटर
- 15 लीटर
- 20 लीटर
इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि यदि कोई पैकेट वॉल्यूम लीटर या मिलीलीटर में है, तो उसके साथ उसका वजन किलोग्राम या ग्राम में लिखना भी जरूरी होगा। निर्माताओं को इस नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है।
उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा, बढ़ेगी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
परिषद के प्रवक्ताओं का मानना है कि इस फैसले से अब उपभोक्ता सीधे तौर पर दो अलग-अलग ब्रांड के तेल की शुद्धता और प्रति लीटर दाम की तुलना आसानी से कर सकेंगे। भ्रामक और अजीबोगरीब साइज बनाकर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली पैकेजिंग पर अब पूरी तरह लगाम लगेगी। इस निर्णय से तेल उद्योग में पैकेजिंग के बजाय शुद्धता, गुणवत्ता और सही मूल्य के आधार पर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू होगी।
प्रशासन और जनता से अपील
हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इस संक्रमण अवधि (Transition Period) के दौरान और उसके बाद बाजार में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर या मिल मालिक ‘पुराने स्टॉक’ के नाम पर उपभोक्ताओं का शोषण न कर सके। इसके साथ ही परिषद ने प्रदेश के समस्त उपभोक्ताओं से भी सजग रहने और सरकार के इस निर्णय को पूरी तरह लागू करने में सहयोग करने की अपील की है।
“जागो ग्राहक जागो।”
