सेवा, अध्यात्म और सामाजिक परिवर्तन के 45 वर्ष पर आर्ट ऑफ लिविंग के उत्सव में राजनीति, उद्योग, खेल और कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों का संगम, मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने भी की शिरकत
अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक व धार्मिक संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष के भव्य उत्सवों के बीच देशभर से राष्ट्रीय नेतृत्व और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विभूतियाँ लगातार आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर पहुँच रही हैं। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार को आश्रम पहुँचे, जहाँ उन्होंने वैश्विक मानवतावादी एवं आध्यात्मिक गुरु, गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।



गुरुदेव की विश्व-दृष्टि और उनके कार्यों की सराहना करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मुझे विशेष प्रसन्नता है कि गुरुदेव ने प्राकृतिक खेती के आंदोलन को जिस ऊँचाई तक पहुँचाया है, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। यहाँ की शिक्षा व्यवस्था अपने आप में अद्वितीय है। इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है कि वे भारतीय संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर लगे हुए हैं।”
आर्ट ऑफ लिविंग को एक ऐसे विचार के रूप में वर्णित करते हुए, जिसने बीते साढ़े चार दशकों में एक विराट जनआंदोलन का रूप धारण कर लिया है, श्री सुक्खू ने कहा, कि जब कोई विचार जन्म लेता है, तो वह सदियों तक जीवित रहता है। समय के साथ वही विचार समाज की संस्कृति को आकार देता है और अंततः एक सभ्यता का निर्माण करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ऐसा ही एक विचार है, जो विश्व को आलोकित करेगा। समय की दृष्टि से भले ही 45 वर्ष पूरे हुए हों, किंतु जिस प्रकार इस आंदोलन ने राष्ट्र की संस्कृति और मानवीय मूल्यों की सेवा को अपना संकल्प बनाया है, वह आने वाले वर्षों में भारत ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करता रहेगा।”
महीने भर चलने वाले ये विराट उत्सव देश और दुनिया के विविध क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों का अद्भुत संगम बन चुके हैं। राष्ट्रीय नेता, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, उद्योगपति, ओलंपियन, कलाकार, आध्यात्मिक गुरु तथा जमीनी स्तर पर कार्यरत समाजसेवी बड़ी संख्या में इन आयोजनों में सहभागी हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में आश्रम जनजीवन और अध्यात्म के अद्वितीय समागम का केंद्र बन गया है, जहाँ गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के शांति स्थापना, मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सेवा कार्यों में दिए गए आजीवन योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया जा रहा है।
उत्सव में अब तक सम्मिलित होने वाली प्रमुख हस्तियों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, महान अभिनेता रजनीकांत, सुप्रसिद्ध लोकगायक स्वरूप खान, विख्यात कथा-वाचक इंद्रेश उपाध्याय सहित अनेक आध्यात्मिक नेता, राजनयिक, उद्योगपति, कलाकार तथा विश्वभर से आए हजारों साधक और स्वयंसेवक शामिल रहे हैं।
इन आयोजनों के दौरान आगंतुकों ने आश्रम के विस्तृत हरित परिसर का अवलोकन किया, जिसमें श्री श्री गौशाला विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यहाँ भारत की 19 दुर्लभ देशी नस्लों की लगभग 1600 गौमाताओं का संरक्षण किया जा रहा है, जो भारतीय गोवंश परंपरा और प्राकृतिक खेती के संवर्धन के सतत प्रयासों का प्रतीक है।
अतिथियों ने आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोग्राम से जुड़े बच्चों की अद्भुत प्रतिभा का भी साक्षात्कार किया। यह कार्यक्रम इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब मन शांत होता है, तो बच्चों में अंतर्निहित छठी इंद्रिय स्वाभाविक रूप से जागृत होने लगती है। प्रशिक्षित बच्चों ने आँखों पर पट्टी बाँधकर पढ़ने और पहेलियाँ सुलझाने जैसी आश्चर्यजनक क्षमताओं का प्रदर्शन किया, यद्यपि इस कार्यक्रम के लाभ इन प्रदर्शनों से कहीं अधिक व्यापक हैं।
उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आर्ट ऑफ लिविंग के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा था,
“आज आर्ट ऑफ लिविंग एक विशाल वटवृक्ष के समान हमारे सामने खड़ा है, जिसकी हजारों शाखाएँ विश्वभर में असंख्य लोगों के जीवन को स्पर्श कर रही हैं।”
हिमाचल प्रदेश में सेवा और संवेदना की अमिट छाप
यह भेंट विशेष महत्व रखती है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश में आर्ट ऑफ लिविंग की सेवा-यात्रा वर्षों से गहराई से अनुभव की जाती रही है।
जून 2025 में जब मंडी जिले में बादल फटने की घटनाओं ने व्यापक तबाही मचाई और अनेक गाँव मुख्य मार्गों से कट गए, तब आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक और स्वयंसेवक सबसे पहले राहत कार्यों में पहुँचे। दुर्गम और क्षतिग्रस्त रास्तों पर प्रतिदिन लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलकर उन्होंने प्रभावित परिवारों और एसडीआरएफ कर्मियों के लिए ध्यान एवं मानसिक आघात से उबरने के सत्र आयोजित किए। साथ ही सौर दीप, तिरपाल, भोजन, दवाइयाँ और बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई।
पराला गाँव की थुल्जू देवी ने भावुक होकर कहा,
“अब तक कोई भी हमारी स्थिति जानने नहीं आया था। इस कठिन समय में आप लोगों ने आकर हमारी पीड़ा सुनी, इससे हमें बहुत सहारा मिला।”
चौथी इंडिया रिज़र्व बटालियन के डीएसपी मनोहर लाल ने कहा,
“आर्ट ऑफ लिविंग ने लोगों को भीतर से फिर खड़े होने की शक्ति दी।”
आपदा राहत से आगे बढ़कर आर्ट ऑफ लिविंग ने प्राकृतिक खेती, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से भी हिमाचल प्रदेश में जीवन परिवर्तन का कार्य किया है। सोलन में वर्ष 2009 से चल रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों में कंप्यूटर, इलेक्ट्रिकल और ब्यूटीशियन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है, जिनके उत्पाद राष्ट्रीय स्तर के मेलों तक पहुँच चुके हैं।
45 वर्षों का राष्ट्रीय प्रभाव
आज आर्ट ऑफ लिविंग भारतभर में 1356 निःशुल्क विद्यालयों का संचालन कर रहा है, जहाँ 1.2 लाख से अधिक वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। संगठन की नदी पुनर्जीवन परियोजनाओं के माध्यम से 75 नदियों और सहायक धाराओं को पुनर्जीवित किया गया है, जिससे 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ पहुँचा है। वहीं प्राकृतिक खेती कार्यक्रमों के माध्यम से 30 लाख किसानों तक पहुँच बनाकर ऋणभार कम करने, मिट्टी की उर्वरता पुनर्स्थापित करने और आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।
आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय में चल रहे ये 45वें वर्ष के उत्सव पूरे माह ध्यान, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, ज्ञान सत्रों, सेवा अभियानों और विविध क्षेत्रों के नेताओं के संवादों के माध्यम से जारी रहेंगे। यह समूचा आयोजन गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के उस शाश्वत संदेश को पुनः प्रतिध्वनित कर रहा है कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर की शांति से होती है।
