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अपना हक न मिलने से क्षुब्ध करुणामूलक आश्रित आमरण अनशन के लिए मजबूर- सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

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हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के करूणामूलक आश्रितों ने राज्य सरकार से करूणामूलक आधार पर नौकरी देने की मांग उठाई है। वन विकास निगम करूणामूलक आश्रित संघ का कहना है कि वर्ष 2005 से अभी तक करूणामूलकों को निगम में नौकरी नहीं मिली है। 130 करूणामूलक आश्रित कई सालों से अपने हक़ पाने को तरस रहे हैं।

प्रदेश वन विकास निगम करूणामूलक आश्रित संघ के प्रधान दिनेश कुमार ने रविवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि वन विकास निगम में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के 150 पद रिक्त पड़े हैं। लेकिन निगम उन्हें लगातार हताश कर रहा है। वर्तमान सरकार से कई बार यह मामला उठाया गया है, लेकिन महज झूठा आश्वासन ही मिला है। करूणामूलक आश्रितों ने सरकार को चेताया कि अगर सरकार ने 15 दिन के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी, तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे।

सरकार के रवैये पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि करूणामूलकों को नौकरी के लिए 5 फीसदी का कोटा निर्धारित है। इस कोटे को हटा दिया जानपा चाहिए, क्योंकि इसे उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। बीते 15 सालों से करूणामूलक के मामले लंबित पड़े हैं और सभी आश्रित नौकरी की आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि वन विकास निगम में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के करूणामूलक पदों को वन टाइम रिलेक्सेक्शन के तहत भरा जाए। यह भी कहा कि वे चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करने को भी तैयार हैं।

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