आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर को 182 देशों में शांति के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार से कियस गया सम्मानित,संस्था के करोड़ों सदस्यों ने दी बधाई
विश्व शांति मंच (World Peace Forum) द्वारा वैश्विक मानवतावादी, आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को प्रतिष्ठित लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें विश्व के 182 देशों में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह सम्मान गुरुदेव के 45 वर्षों के उस निरंतर प्रयास को मान्यता देता है, जिसमें उन्होंने आंतरिक शांति को बढ़ावा दिया, लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों के समाधान में सहयोग किया, हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में मानसिक आघात से उबरने के लिए सहायता प्रदान की और करोड़ों लोगों को शांति के वाहक बनने के लिए प्रेरित किया।



पिछले चार दशकों में गुरुदेव ने विश्व के अनेक संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तनावमुक्त जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों पर आधारित उनके कार्यक्रमों ने विश्वभर में करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से स्पर्श किया है।
पुरस्कार ग्रहण करते हुए गुरुदेव ने संघर्षों की जड़ों को समझने और उन्हें दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, “संघर्ष का मूल कारण व्यक्ति के भीतर शांति का अभाव है। संघर्ष क्षेत्रों में हमारे अनुभव ने दिखाया है कि समाज को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो पुल बना सकें, संवाद को पुनर्जीवित कर सकें और विश्वास को फिर से स्थापित कर सकें। आज ऐसे मध्यस्थों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। मैं चाहता हूँ कि हर युवा जहाँ भी समाज में विभाजन देखे, वहाँ एक सेतु बने।”
उन्होंने आगे कहा कि शांति को निष्क्रियता नहीं समझना चाहिए। “शांति उदासीनता नहीं है और आक्रामकता साहस नहीं है। वास्तविक शांति तब जन्म लेती है जब व्यक्ति जागरूक भी हो और सक्रिय भी।”
मानवता के सामने उपस्थित सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक तनाव पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा, “तनाव मानवता के सबसे बड़े शत्रुओं में से एक है। तनावमुक्त मन और हिंसामुक्त समाज ही स्थायी शांति की नींव हैं।”
गुरुदेव ने यह भी कहा कि शांति को उतना ही महत्व मिलना चाहिए जितना सुरक्षा को दिया जाता है। उन्होंने कहा, “हम अक्सर शांति और सुरक्षा की बात एक साथ करते हैं, लेकिन जहाँ सुरक्षा के लिए अपार संसाधन लगाए जाते हैं, वहीं शांति के संस्कार विकसित करने पर अभी भी बहुत कम ध्यान दिया जाता है।”
लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने विश्व स्तर पर शांति, मेल-मिलाप और मानव गरिमा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।
