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शिमला ग्रामीण के पाहल गांव के जंगलों में भड़की आग,लाखों की वन संपदा और असंख्य जीव जंतु हुए राख, लोगों की सूझ बूझ से बाल बाल बचे धार गांव के आधा दर्जन मकान

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शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली पहला पंचायत के साथ लगती बस्ती नया तोड़ के साथ लगते चल के जंगलों में भयानक आग भड़क रही है बीते दो दिनों से इस क्षेत्र के पूरे जंगल को आज ने अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते यह आग नया तोड़ क्षेत्र में धार गांव के घरों की तरफ आ पहुंची । धार गांव के साथ लगते कड़ावग और शलांगरी के जंगलों की आग धार गांव की बस्ती तक पहुंच गई जिससे यहां बने करीब आधा दर्जन मकान को खतरा हो गया ।


पाहल गांव के इन जंगलों में लगी भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इस आग के कारण वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटें नायतोड (Naytod) गांव की रिहाइशी बस्ती के बिल्कुल नजदीक तक पहुंच गईं, जिससे ग्रामीणों के घरों पर सीधा खतरा मंडराने लगा था।

​गनीमत यह रही कि नयातोड़ धार गांव वासियों ने पहले से ही संभावित खतरे को भांपते हुए पूरी सावधानी बरती थी। आग बुझाने के लिए ग्रामीण पहले से तैयार थे। जैसे ही आग गांव की सीमा तक पहुंची, ग्रामीणों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। पहले से तैनात किए गए टुल्लू पंप और पाइप लाइनों की मदद से पानी की बौछारें शुरू की गईं।
​ग्रामीणों और वार्ड सदस्य की एकजुटता ने अद्भुत मिसाल पेश करते हुए जंगल की इस भयानक आग के इरादों को विफल कर दिया ।
​खतरे की घंटी बजते ही नायतोड के ग्रामीण भारी संख्या में इकट्ठा हुए और अपनी जान की परवाह किए बिना सामूहिक प्रयासों से आग पर काबू पा लिया। इस पूरे संकट के दौरान स्थानीय वार्ड मेंबर ने भी मौके पर मौजूद रहकर ग्रामीणों का पूरा सहयोग किया और मोर्चे की अगुवाई की। ग्रामीणों का कहना है कि अगर आज एकजुटता न दिखाई होती, तो एक बड़ी त्रासदी हो सकती थी।

​इस पूरी घटना ने स्थानीय प्रशासन और विशेषकर जल विभाग की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ भारी रोष है।
​ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 15 दिनों से नायतोड का प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख चुका है। वे लगातार जल विभाग से निवेदन कर रहे हैं कि उन्हें पाहल’ (Pahal) वाली लाइन से पानी की सप्लाई दी जाए, लेकिन विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इस भीषण गर्मी और आग के संकट के बीच भी उन्हें पानी के लिए तरसाया जा रहा है।”

​आग पर फिलहाल काबू तो पा लिया गया है, लेकिन मौसम के मिजाज और सूखी हवाओं को देखते हुए खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। सुलगते हुए पत्तों और मलबे से आग दोबारा भड़कने की पूरी आशंका है। ग्रामीणों ने फैसला किया है कि वे अगले कुछ दिनों तक पूरी सावधानी बरतेंगे और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखेंगे।

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