भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी व विधायक रणधीर शर्मा का एस.आई.आर. मामले में कांग्रेस पर करारा हमला, एस.आई.आर. के विरोध को बताया असंवैधानिक, ईवीएम और जनादेश पर कांग्रेस के दोहरे मानदंड को देश की राजनीति के लिए बताया दुर्भाग्यपूर्ण
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं श्री नैना देवी जी से विधायक रणधीर शर्मा ने शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को असंवैधानिक करार देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रियाओं और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति जनता में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
संविधान के प्रावधानों की अनदेखी का आरोप लगते हुए रणधीर शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के शुद्धीकरण एवं पुनरीक्षण का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि 2002-2004 के दौरान भी यह प्रक्रिया अपनाई गई थी और 2025 से यह पुनः शुरू हुई है। जो कांग्रेस पार्टी लगातार ‘वोट चोरी’ और फर्जी मतदाताओं का मुद्दा उठाती रही है, वही अब मतदाता सूची के शुद्धीकरण की प्रक्रिया (SIR) का विरोध कर रही है, जो उसकी विरोधाभासी मानसिकता का प्रमाण है।
EVM और चुनाव आयोग पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप के साथ कांग्रेस के चुनावी दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि जब कांग्रेस हिमाचल, कर्नाटक या पंजाब में चुनाव जीतती है, तब उसे जनता का जनादेश मानती है। लेकिन जब चुनाव हारती है, तो तुरंत EVM और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उंगली उठाने लगती है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को घेरते हुए सवाल किया कि यदि उन्हें चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है, तो क्या वे अपनी स्वयं की जीत पर सवाल उठाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे?
स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों का दिया हवाला देते हुए रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हालिया नगर निगम और पंचायती राज चुनावों के परिणाम कांग्रेस के दावों की पोल खोलते हैं। EVM से हुए नगर निगम चुनावों (चार में से तीन स्थानों पर भाजपा की जीत) और बैलेट पेपर से हुए पंचायत चुनावों—दोनों ही माध्यमों में जनता ने भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को भारी समर्थन दिया है। इससे साबित होता है कि मतदाता जागरूक हैं और मतदान का माध्यम चाहे जो हो, जनसमर्थन भाजपा के साथ है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों का खुद सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी के पास अब कार्यकर्ता तक नहीं बचे हैं। कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों से ध्यान भटकाने और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने के बजाय अपनी नीतियों और नेतृत्व पर आत्ममंथन करना चाहिए।
