पूर्व मुख्यमंत्री स्व.वीरभद्र सिंह के नाम से राजनीतिक दल बनाने की अटकलों पर सांसद प्रतिभा सिंह नाराज़, बिना अनुमति के ऐसे प्रयास के खिलाफ चुनाव आयोग को लिखा शिकायत पत्र
हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नाम और विरासत के राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए उनकी पत्नी व पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने सख्त कदम उठाया है। प्रतिभा सिंह ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त को एक औपचारिक पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि स्वर्गीय वीरभद्र सिंह या बुशहर रियासत से जुड़े नामों पर किसी भी नई राजनीतिक पार्टी का पंजीकरण न किया जाए।
पत्र में पूर्व सांसद ने उल्लेख किया कि वर्ष 2027 में होने वाले आगामी हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ तत्व प्रदेश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके संज्ञान में आया है कि कुछ लोग स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के जनप्रभाव और साख का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए “राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस” या “वीर कांग्रेस” जैसे नामों से नए दल गठित करने की फिराक में हैं।
प्रतिभा सिंह ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि केवल नाम ही नहीं, बल्कि “राजा”, “बुशहर” या “राजा बुशहर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके भी पार्टियां बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ये सभी शब्द सीधे तौर पर पूर्व बुशहर रियासत के राजा रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की ऐतिहासिक पहचान और विरासत से जुड़े हुए हैं।
प्रतिभा सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को नया राजनीतिक दल बनाने का अधिकार है, लेकिन किसी दिवंगत नेता के नाम और साख का इस तरह अनुचित इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के किसी भी प्रयास के लिए न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने कोई अनुमति या सहमति दी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी नाम या इससे मिलते-जुलते नामों से राजनीतिक दलों के गठन और पंजीकरण पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि यदि आयोग के पास ऐसा कोई भी आवेदन आता है या विचाराधीन है, तो उस पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले उन्हें (प्रतिभा सिंह को) अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाए।
