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अपनी दशकों पुरानी मांग को लेकर आशंका और उम्मीद के बीच शास्त्री व भाषाध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल मिला मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से,एक महीने की दी मोहलत

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आज हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् का प्रतिनिधिमंडल प्रदेशाध्यक्ष डॉ मनोज शैल की अध्यक्षता में शास्त्री एवं भाषाध्यापकों को टीजीटी पदनाम देने के संदर्भ में मुख्यमंत्री जयरामठाकुर, शिक्षा मंत्री गोविन्द ठाकुर, प्रधान सचिव शिक्षा रजनीश से मिला तथा दशकों से चली आ रही शास्त्री एवं भाषाध्यापकों की टीजीटी पदनाम देने हेतु ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में परिषद् के महासचिव डॉ अमित शर्मा, शास्त्री एवं भाषाध्यापकों की संयुक्त समिति के संगठन मंत्री नरेश कुमार, आई टी संयोजक डॉ अमनदीप शर्मा, शिमला क्षेत्र के उपाध्यक्ष अनमोल शर्मा, बलदेव, विश्वनाथ, उपेन्द्र, राकेश रघुवंशी, नरेन्द्र राणा, उरेन्द्र, नरेश, भागचंद शर्मा, सहित लगभग 50 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बाद बाद में पत्रकार वार्ता के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज सेन ने कहा कि संस्कृत और भाषा अध्यापकों की कई दशकों से टीजीटी पदनाम देने की मांग चल रही है सरकारें आई और गई लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से किसी सरकार ने काम नहीं किया उन्होंने कहा कि अन्य विषयों में प्रशिक्षित अध्यापकों को जब टीजीटी पदनाम दिया जा रहा है तो संस्कृत और भाषा अध्यापकों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है । उन्होंने आज मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल को मिले आश्वासन पर संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि वर्तमान सरकार उनकी मांग पर गौर करेगी और संस्कृत और भाषा अध्यापकों को टीजीटी का पदनाम दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि उनकी मांगों को एक महीने के भीतर नहीं माना गया तो उनकी परिषद का यह सौम्य रवैया उग्र आंदोलन में तब्दील हो सकता है ।

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