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हिमाचल के प्रख्यात साहित्यकार व लेखक एस आर हरनोट केरल में सम्मानित, तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में हर दिल पर छाए हरनोट

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केरल विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सभागार में हिंदी विभाग द्वारा 24 से 26 मार्च, 2026 तक आयोजित हो रही त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रख्यात लेखक एस आर हरनोट का सम्मान, कीलें फिल्म का प्रदर्शन और मलयालम में उनकी तीन पुस्तकों के अनुवाद मुख्य आकर्षण रहे। भारतीय साहित्य में अनुवाद की भूमिका विषय पर हो रही इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में एस आर हरनोट ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाते हुए अनुवाद के बहाने मलयालम में अनूदित अपनी तीन पुस्तकों हिडिंब, नदी रंग जैसी लड़की और भागदेवी का चायघर पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि केरल में उन्हें अपने प्रदेश हिमाचल की तरह स्नेह और सम्मान मिला है। क्योंकि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य एक सेतु का काम करता है और एक दूसरी भाषा के इतिहास, संस्कृति, संवेदना, लोक और भूगोल से भी परिचय होता है इसलिए हिमाचल का केरल के साहित्य, संस्कृति और परिवेश से भी रूबरू होने का बड़ा अवसर था। उन्होंने कहा कि केरल उनके लिए एक लक्की राज्य इसलिए रहा है कि केरल विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कॉलेज में वर्ष 2012 में उनके साहित्य पर पहली पी एच डी हुई जिसका सिलसिला आज तक देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में चल रहा है और केरल ही ऐसा राज्य है जहां स्कूलों से लेकर महाविद्यालयों और यूनिवर्सिटी में उनकी पहली बार दो कहानियां एम डॉट कॉम और मां पढ़ती है पाठ्यक्रमों में लगी और बाद में अभी कहानी भी शामिल की गई जो कई सालों से पढ़ाई जा रही है जिसके लिए उन्होंने केरल विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। यह जानकारी हिंदी विभाग की सह आचार्या डॉ. इंदू के.वी ने मीडिया को दी।

मंच पर एस आर हरनोट के साथ विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो.(डॉ) मोहनन कुन्नुम्मल, हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हेरमन, सीनियर प्रोफसर डॉ आर जयचन्द्रन और अन्य गणमान्य प्राध्यापक उपस्थित थे। आदरणीय उप कुलपति ने संत राम हरनोट अभिसंबोधन करते हुए सुदूर हिमाचल से केरल आने के लिए और अपनी उपस्थिति से केरल विश्वविद्यालय को गौरवान्वित करने के लिए हरनोटजी से आभार प्रकट की | हिडिंब उपन्यास के अनुवादक डॉ मोहनन वी टी वी ने उपन्यास अनुवाद की प्रति एस आर हरनोट को भेंट की। उनकी दो कृतियों के अनुवाद हो गए हैं जो प्रकाशनाधीन है।

डॉ.इंदु ने जानकारी दी कि हिडिंब उपन्यास आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड पंचकूला से प्रकाशित हुआ है जिसका अनुवाद प्रख्यात लेखक, अनुवादक डॉ. मोहनन वी टी वी द्वारा किया गया है जो केरल के प्रतिष्ठित प्रकाशन समयम बुक्स ने छापा है। डॉ. मोहनन सर सैयद कॉलेज तलिपरम्ब, केरल में एसोसिएट प्रोफेसर है। कहानी संग्रह भागादेवी का चायघर का अनुवाद मैने ( डॉ.इंदु के. वी) और वाणी प्रकाशन से प्रकाशित उपन्यास “नदी रंग जैसी लड़की” का अनुवाद -प्रो.(डॉ.) श्रीलता विष्णु ने किया जो सीनियर प्रोफेसर एवं श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व विभागाध्यक्षा हैं।

डॉक्टर इंदु ने ये भी बताया कि संगोष्ठी के दूसरे दिन एस आर हरनोट की बहुचर्चित कहानी “कीलें” पर आधारित फिल्म “कील” को भी दिखाया गया जिसका निर्देशन और निर्माण जाने माने अभिनेता आर्यन हरनोट ने किया है। फिल्म इतनी पसंद की गई कि सभी भावुक हो गए। इस अवसर पर प्राध्यापकों और छात्रों ने बहुत से प्रश्न लेखक से पूछे। उन्होंने कहा कि अनुवाद पर हो रही संगोष्ठी में उस लेखक की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है जिसकी कृतियों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ हो, इसलिए हरनोट जी इसके लिए बहुत उपयुक्त रहे जिनकी रचनाओं का अंग्रेजी, मलयालम के साथ कई विदेशी और भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है। मंच का सफल संचालन शोध छात्र अनुजा ने बहुत सार्थक टिप्पणियां दे कर कियडॉक्टर इंदु ने बताया कि एस आर हरनोट इस त्रिदिवसीय संगोष्ठी के सम्मान और समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि रहे जिसमें केरल विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की प्रो.(डॉ) एस आर जयश्री को उनकी सेवानिवृत्ति पर सम्मानित किया गया और उनके सम्मान में हिंदी विभाग के शोध छात्रों और विद्यार्थियों द्वारा खूबसूरत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि हरनोट की मलयालम में अनुवाद हुए दो उपन्यासों और कहानी संग्रह का लोकार्पण केरल के लेखक अनुवादक उनके गृह जिले शिमला में शीघ्र करेंगे।

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