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भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के जिलापरिषद और बीडीसी सदस्यों पर दिए बयान को लिया हाथों हाथ,पार्टी ने 251 जिला परिषद,1800 बीडीसी प्रतिनिधियों और लाखों मतदाताओं का बताया बड़ा अपमान

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पंचायती राज चुनाव के नतीजों के बाद जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों पर भाजपा के दावों पर चुटकी लेकर जो बयान दिया उसे भाजपा न केवल हाथों हाथ लिया बल्कि इसे लेकर जीते हुए उम्मीदवारों के संयुक्त बयान भी मीडिया को चस्पा कर दिए हैं । ज़िला परिषदों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि जिला परिषद और बीडीसी की वैल्यू केवल एक दिन की है, लोकतांत्रिक व्यवस्था का सीधा अपमान है। जिला परिषद, बीडीसी, पंचायतें और स्थानीय निकाय लोकतंत्र की सबसे मजबूत और बुनियादी इकाइयां हैं। इन्हीं संस्थाओं के माध्यम से गांव, पंचायत और क्षेत्र के विकास की दिशा तय होती है। ऐसे में इन संस्थाओं और इनके निर्वाचित प्रतिनिधियों को कमतर आंकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 251 जिला परिषद सदस्य और लगभग 1800 बीडीसी सदस्य जनता के सीधे मतदान से चुनकर आए हैं। प्रत्येक प्रतिनिधि के पीछे हजारों मतदाताओं का विश्वास और जनसमर्थन खड़ा है। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ने इन सभी जनप्रतिनिधियों और उन्हें चुनने वाले लाखों मतदाताओं का अपमान किया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में कोई भी जनप्रतिनिधि छोटा या बड़ा नहीं होता। जनता द्वारा चुना गया हर प्रतिनिधि लोकतंत्र की गरिमा और जनभावनाओं का प्रतीक होता है। यदि मुख्यमंत्री स्वयं लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करेंगे तो जनता को क्या संदेश जाएगा।

जिला परिषद सदस्यों ने कहा कि हाल ही में हुए पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों में जनता ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है। कांग्रेस पार्टी जिला परिषद, बीडीसी, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में बुरी तरह पराजित हुई है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता अब जनादेश का सम्मान करने के बजाय उसे छोटा साबित करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी आज भय और हताशा के दौर से गुजर रही है। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की जनता वर्तमान सरकार की नीतियों से असंतुष्ट है। जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना संदेश दे दिया है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व उस संदेश को स्वीकार करने की बजाय जनप्रतिनिधियों की गरिमा पर सवाल उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान न केवल असंवैधानिक सोच को दर्शाता है बल्कि यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने का प्रयास भी है। जिला परिषद और बीडीसी सदस्य गांव-गांव और घर-घर तक जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इन प्रतिनिधियों का अपमान वास्तव में आम जनता की आवाज का अपमान है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि जनता इस प्रकार की टिप्पणियों को भूल जाएगी। प्रदेश का जनमानस सब कुछ देख रहा है। जनता ने स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस को जवाब दिया है और भविष्य में भी ऐसे अहंकारी रवैये का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को तत्काल अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। यदि कांग्रेस नेतृत्व लोकतंत्र और जनमत का सम्मान करता है तो उसे अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए। अन्यथा जनता आने वाले समय में इसका पूरा हिसाब लेगी।

शिवानी ठाकुर, विजय कुमार (वीजू), अशोक शर्मा और अनिल राणा ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है। जनता और जनमत का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कांग्रेस की विदाई यात्रा शुरू हो चुकी है और प्रदेश की जनता लोकतंत्र के इस अपमान को कभी माफ नहीं करेगी।

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