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मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने की रेडी-एचपी परियोजना की समीक्षा, सुदृढ़ आधारभूत संरचना और आजीविका संरक्षण पर दिया बल

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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज रेज़िलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी हिमाचल प्रदेश (रेडी-एचपी) परियोजना की प्रगति एवं क्रियान्वयन को लेकर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि 2687 करोड़ रुपये लागत की यह महत्वकांक्षी परियोजना प्रदेश मंेें आपदा प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ करने तथा प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में एक प्रभावी एवं दूरदर्शी पहल सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच प्रदेश में बादल फटने की 86, भूस्खलन की 234 और बाढ़ की 121 घटनाएं दर्ज की गई जिनसे प्रदेश को 12,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश संवेदनशील हिमालयी भू-वैज्ञानिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य आपदा प्रभावित बुनियादी ढांचे, जिसमें सड़कें, जलापूर्ति योजनाएं, बिजली तथा आजीविका परियोजनाओं आदि की पुनर्स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पूरे राज्य में आपदा के बाद पुनर्वास के लिए एक सुदृढ़ एवं प्रभावी तंत्र विकसित करना है। रेडी-एचपी परियोजना प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत लोगों को शीघ्र राहत और मजबूत पुनर्वास सुविधा प्रदान करने में सहायता करेगी। यह सरकारी योजना सेवाओं को बेहतर बनाने पर कार्य करेगी तथा ग्रीन पंचायत जैसी योजनाओं के माध्यम से लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सामाजिक सुरक्षा व बीमा व्यवस्था मजबूत होगी।
उन्होंने किसानों और बागवानों के लिए मजबूत सुविधाएं और ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि प्राकृतिक आपदाओं के समय उनकी फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके।
बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व के.के. पंत, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सलाहकार योजना वीरेन्द्र कुमार, निदेशक ऊर्जा राकेश कुमार प्रजापति, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज राघव शर्मा, उप-परियोजना निदेशक सुरेन्द्र मालटू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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