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अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ ने चेताया-टेट को नहीं बनने देंगे शिक्षकों की नौकरी छीनने का हथियार,सरकारों से संवेदनशीलता से फैसला लेने की दी सलाह

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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन मिश्रा ने कहा है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को शिक्षकों की नौकरी छीनने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि वर्षों से शिक्षा सेवा में कार्यरत शिक्षकों तथा उनके परिवारों की आजीविका और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील निर्णय लिए जाएं।
हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी कार्यक्रम में आयोजित राज्य बैठक में उपस्थित दायित्ववान कार्य कर्ताओं को संबोधित करते हुए पवन मिश्रा ने कहा कि देशभर में लाखों शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और उचित तरीके से लगे हैं।


प्रांत मीडिया प्रमुख शशि शर्मा ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ऐसे टीईटी को लेकर बनाए जा रहे नियमों और शर्तों से यदि कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं पर संकट उत्पन्न हो गया है इसका सीधा प्रभाव देश भर में लाखों परिवारों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकारों का दायित्व है कि वे शिक्षकों के हितों की रक्षा करें और ऐसी नीतियां बनाएं जो शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की आधारशिला हैं और उनके मन में असुरक्षा की भावना पैदा होने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। महासंघ ने मांग की कि टीईटी संबंधी सभी मामलों में शिक्षकों के हितों, उनके अनुभव और सेवा अवधि को उचित महत्व दिया जाए।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे इस विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो देशभर के शिक्षक संगठनों में व्यापक असंतोष उत्पन्न हो सकता है। प्रांत कार्यकारिणी की इस बैठक में प्रदेश भर से समस्त प्रदेश कार्यकारिणी, जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।

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