नशे की गर्त में जाती युवा पीढ़ी में लड़कियां भी पीछे नहीं,कोटखाई में 19 वर्षीय युवती और एक युवक को पुलिस ने करीब साढ़े 9 ग्राम चिट्टे के साथ धर दबोचा, आगामी कार्रवाई जारी
जिला शिमला पुलिस द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे कड़े अभियान के तहत पुलिस थाना कोटखाई की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कोटखाई तहसील के गांव छोल में एक कमरे पर दबिश देकर दो आरोपियों के कब्जे से 9.57 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद की है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान विशाल ताज्टा (36 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय श्री सुरेश ताज्टा (निवासी गांव छोल, कोटखाई) और प्रियंका (19 वर्ष) पुत्री श्री हरि सिंह (निवासी गांव व डाकघर जुब्बल, जिला शिमला) के रूप में हुई है। इस संबंध में पुलिस थाना कोटखाई में एफआईआर संख्या 93/2026, दिनांक 29.10.2026, के तहत एनडीएंडपीएस एक्ट (ND&PS Act) की धारा 21 और 29 के अंतर्गत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नशे के कारोबार में युवतियों व महिलाओं की संलिप्तता: समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी
इस पूरी घटना में सबसे अधिक चिंताजनक और विचारणीय पहलू एक 19 वर्षीय युवती का इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाया जाना है। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के दलदल में अब युवा पीढ़ी के साथ-साथ युवतियों का उतरना समाज, परिवार और व्यवस्था के लिए एक गहरी चिंता का विषय बन गया है।
जिस उम्र में युवाओं के हाथों में किताबें, भविष्य के सपने और करियर को गढ़ने की जिम्मेदारी होनी चाहिए, उस उम्र में उनका इस प्रकार की खतरनाक लत और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होना बेहद डरावना है। यह स्थिति इस बात की गवाही देती है कि ड्रग्स का यह जाल हमारी युवा संस्कृति को कितनी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है।
चिंतन और कड़े कदमों की आवश्यकता
समाजशास्त्रियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस दिशा में समय रहते गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति आने वाले समय में और अधिक भयावह रूप ले सकती है। यह घटना केवल एक पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें।
प्रशासन और पुलिस का नशे के खिलाफ अभियान सराहनीय है, परंतु जब तक समाज खुद आगे आकर इस बुराई के खिलाफ जागरूक नहीं होता, तब तक देवभूमि को इस कलंक से पूरी तरह मुक्त कराना कठिन होगा।
