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मुख्यमंत्री सुक्खू ने बीडीसी और जिलापरिषदों की बताई ज़ीरो वैल्यू,कहा- असल शक्ति प्रधान व उपप्रधान के हाथ में ,क्या मुख्यमंत्री माइंड गेम खेल रहे हैं ?

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प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के नतीजों के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दावों पर तीखा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा केवल झूठ की राजनीति और बयानबाजी कर रही है, जबकि धरातल पर जनता ने कांग्रेस पार्टी को भारी जनसमर्थन दिया है।
​मुख्यमंत्री ने कहा कि डींगें मारने से काम नहीं चलेगा। भाजपा ने इस प्रदेश का बेड़ा गर्क किया है और प्रदेश की संपदा को बेचने का काम किया है । ​पंचायत और बीडीसी चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा है । ​मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधान और उपप्रधान स्तर पर उनकी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा:
​”बीडीसी (BDC) और जिला परिषद की वैल्यू सिर्फ एक दिन की होती है (अध्यक्ष चुनने के लिए), असली जमीनी ताकत प्रधान और उपप्रधान होते हैं। उन्होंने दावा किया कि 68 पंचायत समितियां में से लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा पर कांग्रेस विचारधारा के लोग जीते हैं ।


​मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को साफ निर्देश दिए कि विपक्ष के किसी भी बहकावे में आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनता उनके साथ खड़ी है।
​कांगड़ा और धर्मशाला के नतीजों पर आंकड़ों से घेरा
​भाजपा के दावों को खारिज करने के लिए मुख्यमंत्री ने जिला कांगड़ा और धर्मशाला के चुनावी आंकड़ों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि धर्मशाला नगर निगम में भले ही भाजपा के 11 और कांग्रेस के 6 पार्षद जीते हों, लेकिन पूरे कांगड़ा जिले की नगर परिषदों (Municipal Councils) में कांग्रेस ने एकतरफा क्लीन स्वीप किया है।
​मुख्यमंत्री ने जीत की फेहरिस्त गिनाते हुए कहा:
​कांगड़ा नगर परिषद में कांग्रेस की जीत हुई।
​नूरपुर नगर परिषद में भी कांग्रेस ने परचम लहराया।
​ज्वालामुखी नगर परिषद पर भी कांग्रेस का कब्जा हुआ।
​उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा केवल एक नगर निगम (धर्मशाला) की जीत का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन वह बाकी की 5 नगर परिषदों में अपनी करारी हार को छुपा रही है। उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में जहां 30% हिस्सा नगर निगम का होता है, वहीं 20% से ज्यादा हिस्सा नगर परिषदों का भी होता है, जहां भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया है।

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जहां चुनाव से पहले शहरी निकायों और पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर चल रहे थे लेकिन अब नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री ने माइंड गेम खेलते हुए जिला परिषदों और बीडीसी सदस्यों की जीरो वैल्यू करार दी है उन्होंने कहा कि असल शक्ति प्रधानों और उप प्रधानों के हाथ में होती है और यह दोनों ही कांग्रेस पार्टी के अधिक उम्मीदवार जीत कर आए हैं ।

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