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शूलिनी यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल कोचिंग फेडरेशन फाउंडेशन ने यूनिवर्सिटी में वी-एम्पॉवर कोचिंग प्रोग्राम को औपचारिक रूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

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शूलिनी यूनिवर्सिटी सोलन और इंटरनेशनल कोचिंग फेडरेशन फाउंडेशन (आईसीएफएफ) ने एक  साथ इग्नाइट इनिशिएटिव के रूप में यूनिवर्सिटी में वी-एम्पॉवर कोचिंग प्रोग्राम को औपचारिक रूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।आईसीएफएफ फाउंडेशन की इग्नाइट इनिशिएटिव स्थानीय समुदायों में नि:शुल्क कोचिंग पर केंद्रित है। कोचिंग के माध्यम से सामाजिक प्रभाव पैदा करने की इस पहल में आईसीएफएफ के साथ सहयोग करके शूलिनी विश्वविद्यालय प्रसन्न है। सीनियर कोच पायल जिंदल खन्ना ने इस सहयोग को समर्थित कोचिंग के लिए बढ़ाया गया एक कदम बताया।एक रणनीतिक लक्ष्य के रूप में एक साथ आने पर दोनों संगठन संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 2030 सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़े रहेंगे।शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अतुल खोसला ने कहा कि हमें इस कोचिंग हस्तक्षेप के प्रभाव को डेटा कैप्चर करके प्रदर्शित करना चाहिए। ये न केवल व्यक्तिगत प्रभाव बल्कि बड़े आर्थिक प्रभाव के मामले में प्रगति दिखाता है। उन्होंने व्यापक और समावेशी अनुसंधान प्रयासों के 10 वर्षों के आधार पर एक रूपरेखा तैयार करने के लिए ठोस विचार दिए।कोच जयश्री ने छात्रों के फ़ायदे के लिए संस्थान में नए विचारों को चुनने और उन्हें बड़ी गति से लागू करने के लिए विश्वविद्यालय और कुलपति के प्रयासों की सराहना की। डॉ. केसरी ने शूलिनी छात्रों के लिए वहां रहने और बड़े स्तर पर रोजगार योग्य होने की उनकी यात्रा में उनका समर्थन करने के लिए विश्व भर के शिक्षकों के योगदान की सराहना की। कोच सुषमा और कोच मैंडी ने सभी कोचों के काम की सराहना की और कहा कि शूलिनी और आईसीएफएफ ने इस विजन को हकीकत में बदलने की पहल की। आईसीएफएफ टीम की श्रुति सोंथालिया ने टिप्पणी की कि कैशिंग को सुलभ बनाने और कोचिंग के माध्यम से सामाजिक प्रगति पर प्रभाव को तेज करने के लिए प्रज्वलित पहल की आकांक्षा एक स्थायी प्रयास रहा।

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